उज्जायी श्वास: सागर श्वास का संपूर्ण मार्गदर्शिका

· Updated · By Oded Deckelbaum

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किसी भी विन्यास या अष्टांग योग कक्षा में प्रवेश करें और आप इसे सुनेंगे: एक मुलायम, लयबद्ध ध्वनि जो कमरे को भर देती है। यह सागर की लहरों जैसी लगती है। यह उज्जायी प्राणायाम — “विजयी श्वास” — है, और यह आधुनिक शारीरिक योग अभ्यास की सबसे महत्वपूर्ण श्वास तकनीक है।

उज्जायी योग को शारीरिक व्यायाम से चलती-फिरती ध्यान में बदल देता है। यह अभ्यास की गति को नियंत्रित करता है, आंतरिक ताप उत्पन्न करता है और ध्यान को स्थिर करता है।

चरण-दर-चरण सीखें

चरण 1: मुंह खोलें और “हाऽऽ” की ध्वनि करते हुए धीरे-धीरे सांस छोड़ें। गले के पीछे हल्का संकुचन महसूस करें। चरण 2: वही ध्वनि बनाते हुए बीच में मुंह बंद करें। चरण 3: श्वास में भी वही संकुचन लागू करें। चरण 4: दोनों चरणों में ध्वनि को समान और निरंतर बनाएं। चरण 5: ध्वनि केवल आपको सुनाई दे, पूरी कक्षा को नहीं।

लाभ

तापमान नियंत्रण: आंतरिक ताप उत्पन्न करता है। श्वास जागरूकता: निरंतर फीडबैक प्रदान करता है। तंत्रिका तंत्र विनियमन: शांत सतर्कता की स्थिति बनाता है। रीढ़ की स्थिरता: कोर सहभागिता का समर्थन करता है।

आसन अभ्यास में उज्जायी

सूर्य नमस्कार में निर्बाध लय बनाता है। वीरभद्रासन I और वीरभद्रासन II में ध्यान बनाए रखता है। अधोमुख श्वानासन में प्रयास को नियंत्रित करता है।

सामान्य गलतियां

अत्यधिक संकुचन: वर्तमान का 50% कम करें। मुंह से सांस: उज्जायी हमेशा बंद मुंह से अभ्यास करें। चेहरे और कंधों में तनाव: अभ्यास से पहले सचेत रूप से शिथिल करें।

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