प्राणायाम और ध्यान अलग-अलग तंत्र, लक्ष्य और प्रभावों वाले विभिन्न अभ्यास हैं, लेकिन गहराई से पूरक भी हैं। शास्त्रीय योग परंपरा में, प्राणायाम को स्पष्ट रूप से मन को ध्यान के लिए तैयार करने हेतु डिज़ाइन किया गया था।
प्राणायाम क्या है?
श्वास का जानबूझकर नियंत्रण। उदाहरण: नाड़ी शोधन, भ्रामरी, उज्जायी। श्वास हेरफेर का विषय है।
ध्यान क्या है?
ध्यान और जागरूकता को प्रशिक्षित करने का अभ्यास। मन प्रशिक्षण का विषय है।
मुख्य अंतर
सक्रिय बनाम ग्रहणशील: प्राणायाम सक्रिय; ध्यान मूल रूप से ग्रहणशील। शरीर बनाम मन: प्राणायाम शरीर के माध्यम से; ध्यान मन के माध्यम से काम करता है। तकनीक-विशिष्ट बनाम खुला: भ्रामरी शांत करती है, कपालभाति ऊर्जा देती है। ध्यान कम पूर्वानुमान योग्य है।
प्राणायाम ध्यान को कैसे तैयार करता है
अष्टांग योग में, प्राणायाम चौथा अंग है और ध्यान सातवां। 10-15 मिनट प्राणायाम के बाद मन मापनीय रूप से शांत हो जाता है।
अनुशंसित अनुक्रम
सुबह (20 मिनट): नाड़ी शोधन 5 मिनट → उज्जायी 5 मिनट → ध्यान 10 मिनट शाम (15 मिनट): भ्रामरी 5 मिनट → ओम श्वास 5 मिनट → मौन बैठक 5 मिनट
केवल प्राणायाम कब करें
- योग से पहले: उज्जायी
- तीव्र तनाव: शारीरिक आह या बॉक्स ब्रीदिंग
- ऊर्जा प्रबंधन: कपालभाति
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