यदि आपने कभी किसी योग कक्षा में भाग लिया है, तो आपने शायद प्रशिक्षक को कहते सुना होगा “अपनी सांस से जुड़ें” या “सांस को गति का नेतृत्व करने दें”। ये संकेत योग के सबसे महत्वपूर्ण — और सबसे अनदेखे — आयामों में से एक की ओर इशारा करते हैं: प्राणायाम, श्वास नियंत्रण की प्राचीन साधना।
प्राणायाम केवल गहरी सांस लेना नहीं है। यह एक व्यवस्थित अनुशासन है जो श्वास, प्रश्वास और कुम्भक के विशिष्ट पैटर्न का उपयोग करके तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, मानसिक अवस्थाओं को बदलता है और शरीर की प्राण ऊर्जा को निर्देशित करता है। Journal of Clinical Psychology में प्रकाशित शोध ने पुष्टि की है कि संरचित श्वास अभ्यास कोर्टिसोल कम करते हैं, रक्तचाप घटाते हैं, हृदय गति परिवर्तनशीलता में सुधार करते हैं और चिंता तथा अवसाद के लक्षणों को कम करते हैं।
प्राणायाम क्या है?
“प्राण” का अर्थ है “जीवन शक्ति” और “आयाम” का अर्थ है “विस्तार”। पतंजलि के अष्टांग योग में प्राणायाम चौथे स्थान पर है — यम, नियम और आसन के बाद, लेकिन प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि से पहले।
8 मूलभूत प्राणायाम तकनीकें
1. दीर्घ श्वास (तीन-भाग श्वास)
पेट, पसलियों और ऊपरी छाती में क्रमिक रूप से सांस लेना सिखाती है। 5 मिनट अभ्यास करें।
2. सम वृत्ति (समान श्वास)
4 की गिनती में श्वास लें और 4 की गिनती में छोड़ें। 3-5 मिनट अभ्यास करें।
3. रेचक श्वास (विस्तारित प्रश्वास)
4 की गिनती में श्वास लें, 6-8 की गिनती में छोड़ें। 3-5 मिनट अभ्यास करें।
4. पूरक श्वास (विस्तारित श्वास)
6-8 की गिनती में श्वास लें, 4 की गिनती में छोड़ें। ऊर्जा बढ़ाने के लिए।
5. उज्जायी श्वास (सागर श्वास)
विन्यास और अष्टांग योग की मूल श्वास। गले के पिछले भाग को हल्के से संकुचित करें।
6. बॉक्स ब्रीदिंग (चौकोर श्वास)
4 बराबर चरणों में: श्वास, रोकें, प्रश्वास, रोकें। प्रत्येक 4 गिनती। 4-8 राउंड।
7. अनुनाद श्वास (सुसंगत श्वास)
5 सेकंड श्वास, 5 सेकंड प्रश्वास। 5-20 मिनट बनाए रखें।
8. शारीरिक आह (दोहरी श्वास आह)
नाक से 2 तेज श्वास, मुंह से धीमा पूर्ण प्रश्वास। 1-3 दोहराव।
दैनिक अभ्यास कैसे बनाएं
सप्ताह 1-2: हर सुबह दीर्घ श्वास 5 मिनट। सप्ताह 3-4: सम वृत्ति जोड़ें। सप्ताह 5-6: योग में उज्जायी शुरू करें। सप्ताह 7-8: शाम को रेचक या अनुनाद श्वास जोड़ें। जारी: तीव्र तनाव के लिए बॉक्स ब्रीदिंग और तत्काल राहत के लिए शारीरिक आह।
सामान्य गलतियां
सांस पर जोर: चक्कर आए तो प्राकृतिक श्वास पर लौटें। बुनियादी बातें छोड़ना: पहले दीर्घ और सम वृत्ति में महारत हासिल करें। भरे पेट पर अभ्यास: खाने के 2 घंटे बाद प्रतीक्षा करें। असंगतता: सप्ताह में एक बार 30 मिनट से बेहतर है हर दिन 5 मिनट। मुंह से सांस: हमेशा नाक से सांस लें।
शुरुआती श्वास तकनीकों का संग्रह या पूर्ण प्राणायाम पुस्तकालय देखें।
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